श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा में अधिकमास के मनोरथों के क्रम में ज्येष्ठ कृष्ण दशमी पर बुधवार को एक भव्य नाव मनोरथ और चंदन पत्ती मंडली का आयोजन किया गया। गोस्वामी तिलकायत राकेश जी महाराज की आज्ञा और गोस्वामी विशाल बावा के मार्गदर्शन में हुए इस अलौकिक आयोजन में हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।राजभोग झांकी में प्रभु श्रीजी और प्रियाजी को चंदन की सुगंधित पत्तियों और पुष्पों से सजी दुहेरी मंडली में विराजित किया गया। श्रीनाथजी को गुलाबी मलमल की परधनी, हीरे के आभूषण, सिरपैंच, मोतियों की गोल चंद्रिका और मनमोहक पुष्प मालाओं से विशेष श्रृंगार धराया गया। हवेली को उदयपुर के गणगौर घाट, राजमहल और नौका विहार की झलक दिखाती आकर्षक पिछवाइयों से सजाया गया था।संध्या काल में 'चंदन पहर नाव हरि बैठे' मनोरथ के तहत, मोती महल परिसर को कृत्रिम यमुना तट में बदल दिया गया। इत्र से सुगंधित जल, कमल पुष्प, मोगरा और गुलाब से सुसज्जित एक भव्य तरणताल में नाव विहार कराया गया। चांदी के बंगले में श्री मदनमोहन लालजी विराजमान हुए, जबकि सुसज्जित नाव में नवनीत प्रियाजी को बैठाकर अलौकिक भ्रमण करवाया गया।इस दिव्य आयोजन के दौरान, कीर्तनकारों द्वारा 'बैठै घनश्याम सुंदर खेवत है नाव' के मधुर गायन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रभु के इस अलौकिक नौकायन दर्शन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया, और वे इस अविस्मरणीय क्षण के साक्षी बने।
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। इस विषय पर चर्चा शुरू करने वाले पहले पाठक बनें!
समय का अभाव है? जिंजर AI शोध सहायिका की मदद से तुरंत इस लेख का 3-बिंदु विश्लेषण सारांश हिंदी में तैयार करें।
संपादकीय टीम
न्यूज़ जिंजर राजस्थान के आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे, शासन प्रणाली और आंचलिक हितों के कवरेज के प्रति समर्पित निष्पक्ष समाचार पोर्टल है।