देशभर में आयोजित हुई नीट (NEET) परीक्षा एक बार फिर विवादों के घेरे में है, जिसने कई छात्रों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। एक हृदय विदारक घटना में, एक पिता ने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए अपना सब कुछ बेच दिया था, लेकिन परीक्षा केंद्र के बाहर अपनी बेटी का पेपर छूटने पर वह चीख-चीखकर रो पड़े। उनकी यह मार्मिक कहानी लाखों अभिभावकों के दर्द को बयां करती है।
कई अन्य परीक्षार्थियों को भी ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, कुछ छात्रों की परीक्षा कथित तौर पर कांग्रेस की एक रैली के कारण छूट गई, जिसके बाद से इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। मात्र एक मिनट की देरी से तीन परीक्षार्थियों के सपने चकनाचूर हो गए, जब उन्हें परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं दिया गया।
दूसरी ओर, रेवाड़ी में 3673 अभ्यर्थियों ने नीट की पुनः परीक्षा दी। परीक्षा देर से छोड़ने पर एक अधिवक्ता ने नाराजगी व्यक्त की, जबकि परीक्षार्थियों ने बताया कि उनका पेपर अच्छा गया था। कर्नाटक में भी नीट को लेकर भारी बवाल देखने को मिला, जहां 'खाली ट्रंक वाले सांसद' की टिप्पणी को लेकर प्रियांक खड़गे ने तेजस्वी सूर्या पर पलटवार किया है। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि नीट परीक्षा प्रणाली में सुधार की तत्काल आवश्यकता है ताकि छात्रों और अभिभावकों के सपनों को सुरक्षित रखा जा सके।
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