वरिष्ठ लेखकों एवं विश्लेषकों के नीतिगत दृष्टिकोण
राजनीतिक वैज्ञानिक व स्तंभकार
प्रक्रियात्मक ईमानदारी ही किसी भी लोकतंत्र और संवैधानिक भरोसे की जीवन रेखा होती है। यद्यपि हमारी विधायिका अक्सर नए कानूनों का निर्माण करती है, लेकिन वास्तविक सुधार तब तक अधूरा है जब तक कि जाँच एजेंसियों को कार्यपालिका के सीधे राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त न किया जाए, फॉरेंसिक सुविधाओं को जिला स्तर पर आधुनिक न बनाया जाए और पुलिस के मानवीय व्यवहार को बढ़ावा न दिया जाए।
भू-रणनीतिकार व लेखक
पारंपरिक समझौतों और बैठकों पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं है। भारत को अपनी सीमा रक्षा तत्परता को मजबूत करने के साथ-साथ गंभीर आपूर्ति-श्रृंखला विविधीकरण, स्थानीय सेमीकंडक्टर निर्माण के तीव्र प्रसार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान विचारधारा वाले मित्र देशों के साथ मजबूत सैन्य व व्यापारिक गठजोड़ को गति देनी होगी।
खोजी पत्रकार व प्रस्तोता
हम कुछ बड़े स्टार्टअप्स की सफलता का शोर तो खूब सुनते हैं पर उन हजारों उद्यमों की समस्याओं को अनदेखा कर देते हैं जो महंगे रियल एस्टेट की दरों, अप्रचलित बैंकिंग नियमों और शुरुआती लाइसेंस मिलने की असहज प्रक्रियाओं के चलते अपने पैर जमाने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। एक सुरक्षित उद्यमी समाज बनाने के लिए हमें विफलता को भी सम्मान देना होगा।